डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर कार्पोरेशन आफ इडिया लि. डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडार्स की योजना एवं विकास, वित्तीय संसाधनों को गतिशील करने और निर्माण, रखरखाव और परिचालन का उत्तरदायित्व लेने के लिए रेल मंत्रालय के अधीन स्थापित एक विशेष प्रयोजन संस्था है। डीएफसीसीआईएल भारतीय कंपनी अधिनियम 1956 के अधीन अक्तूबर 2006 में शामिल किया गया ।
क्रिसिल द्वारा कंपनी को "एएए" और आई सी आर ए द्वारा "एलएएए" (जिसका एल ट्रिपल ए उच्चारण किया जाता है (स्ट्रक्चर्ड ओब्लिगेशन) की उच्चतम कार्पोरेट क्रेडिट रेटिंग प्रदान की गई है ।
देष भर में डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर्स के निर्माण की योजना भारतीय रेल के इतिहास में सामरिक महत्व के एक अपरिवर्तनीय लक्ष्य को चिन्हित करती है जो आवश्यक रूप से अपने नेटवर्क को मिश्रित रूप से चलाती है । इसके पूर्ण होने पर डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर्स भारतीय रेल को उसके ग्राहक उन्मुखीकरण और बाजार की आवश्यकताओं को और अधिक प्रभावी ढंग से पूरा करने में सक्षम हो पाएगा । रेल अवसंरचना का इतने ब़डे पैमाने पर निर्माण जो स्वतंत्र भारत में अभूतपूर्व है से इसके संरेखण के साथ-साथ औद्योगिक कोरीडोर्स और लोजिस्टिक पार्कों की स्थापना के अभियान की भी उम्मीद है ।
पहले चरण में डीएफसीसीआईएल के दो कोरीडोर्स – पश्चिमी डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर और पूर्वी डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर का निर्माण किया जाएगा जिसकी कुल लंबाई 3300 वर्ग कि.मी. होगी । पूर्वी कोरीडोर पंजाब में लुधियाना से शुरू होकर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार के राज्यों से गुजरता हुआ पश्चिमी बंगाल में दानकुनी में समाप्त होगा । पश्चिमी कोरीडोर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के राज्यों से गुजरता हुआ दादरी से मुंबई तक की दूरी तय करेगा ।